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December 3, 2016

|| शरारत ||

कद ६ फुट 
सीना ५६ इंच
उम्र २६ साल ९५ दिन


इसको  छेड़ दूँ
उसको  छेड़ दूँ
पूरी दुनियां छेड़ दूँ  ।


आँखों में शरारत
दिल में बेचैनी
दिमाग सोच में
क्या कैसे किसको कब छेड़ू !


हर समय चलता एक विचार
किसको बनाऊ अगला शिकार
कौन है मेरा सानी यहाँ
एक ही हुआ है मुझसा यहाँ !


सबको हँसाने का है ज़िम्मा मेरा
सच बोलके या झूठ
कौन करे इसकी परवाह ।


कोई हँसता
और कोई रुठ जाता
कोशिश में इसकी
कभी कभी हू मैं  हार जाता ।


पर कोशिश नहीं छूटेगी
एक दिन ये दुनिया याद करेगी
वो जो हँसाता भी था
और साथ में मारता भी था ।


December 27, 2013

रस्ता

य़ू तोह हम चले अकेले थे
राह में सहारे की सोच ना थी
तुम थाम लोगे दामन ऐसे
इसकी भी उम्मीद ना थी

थामोगे कुछ इस तरह
की फिर कुछ नही होगा तुम्हारे सिवा
ऐसा तोह हमने ख्यालों
में भी सोचने की गुस्ताखी नही की थी

राह में फिर चलते हुए
ना जाने किस मोड़ पर
तुमने हमसे अपनी मंज़िल बदल ली
सुबह की धूप ना जाने क्यू काले बादलों में बदल गयी

ठोकर लगी तोह होश आया
साथ जिसपे फक्र था, ना हमसफ़र बन पाया
फिर भी हम संभले
खुद ही अपनी मंज़िल की तलाश में चल दिये

आज़ लगता है मंज़िल करीब है
ख़ुशी की तलाश में निकले थे , ये बात का यकीन है
हमसफ़र कुछ ऐसे मिले जिनकी हॅसी कानों में ठहर गयी
ख़ुशी के मौसम से हमारी ज़िन्दगी सवर गयी  



 Smita

February 21, 2012

मोहब्बत भी अज़ीब हैं


मोहब्बत भी अज़ीब हैं....
उसकी मुस्कान से हो जाती हैं
और उसकी आंखो मे खो जाती हैं

मोहब्बत भी अज़ीब हैं....
दिल की सुन लेती हैं
ख्वाब बुन लेती हैं

मोहब्बत भी अज़ीब हैं....
लफ्जो का सहारा लेती हैं.
और लबो को बंद कर देती हैं.

मोहब्बत भी अज़ीब हैं....

(चिराग)

August 28, 2011

आज फिर



आज फिर  ये होंठ  मुस्कुराएं  है ,
आज फिर दिल में एक चाहता जागी है  |
आज फिर दुनिया हसीं लग रही है ,
आज फिर जीने की तमन्ना जागी है |
आज फिर  सब अपने लगते हैं,
आज फिर  सारे  दुःख पराये हैं  |
आज फिर  ये शीश झुकता है ,
आज फिर इस्वर पर सजदा,
ये  सारी दुनिया हमारी है  |
 
 

June 22, 2011

मेरे महबूब

वो लटे तेरे बालो की 
कुछ कहती वो निगाहे तेरी

होठ तेरे सुर्ख लाल 
करते हैं कमाल 

वो चुलबुला अंदाज़ 
वो मीठी सी आवाज़

जब जब देखता हूँ तेरी हसीं 
उस दिन का सबसे खुशनसीब पल होता हैं 
वो मेरे लिए

चाहता हूँ कोई ऐसी जगह हो
जहाँ बस तू और मैं रहे 

हाथ मैं हाथ पकड़ कर चले
समंदर के पार 
चल ले एक नया अवतार 

हवाओ का करता हूँ मैं शुक्रिया 
क्योंकि जब -जब उड़ाती हैं ये तेरी जुल्फे 
तेरी खूबसूरती में चार चाँद लग जाते हैं

हसीनाये तो कई देखी मैंने
तुझसे हसीन ना देखी कही 

तारीफ़ और क्या करू तेरी अब 
बस इतना कहूँगा के 
अगर कोई पूछे मुझसे के
इश्क कैसे होता हैं 
तो बस इतना कहूँगा के
एक बार मेरे महबूब को देख लो 
समझ आ जायेगा कैसे होता हैं .  


(C.J)

(P.S:-This poem is for a special friend)

May 25, 2011

काश वापस आ जाये

काश वो दिन फिर आ जाये
पेंसिल की नौक फिर टूट जाये 
नौक करने के बाद के छिलके को पानी में डुबाये 
काश वो दिन फिर आ जाये 

काश वो रबर फिर घूम जाये 
टिफिन काश वो फिर घर से 
लंच टाइम में पापा देने आये 
गेम्स पीरियड का वो इन्तेजार 
वापस आ जाये 

एनुअल फंक्शन का वो डांस 
वो नाटक की तयारी 
वो साइकिल की यारी 
काश वापस आ जाये 

वो साइकिल का पंचर होना 
वो कम्पास में से पेन चोरी होना 
वो ड्राइंग का  पीरियड
वो मोरल साइंस के पीरियड की नींद
वो बुक से क्रिकेट खेलना 
काश वापस आ जाये 


wwf  का वो खुमार 
कोई बनता rock,कोई  undertaker तो कोई rikishi 
वो होली का हुडदंग 
वो संक्रांति की पतंग 
हट ...काटा ......हैं  की
वो आवाज़ 

काश वापस आ जाये

वो दिन वो बीते हुए लम्हे 
आज भी जेहन में हैं मेरे 
बस एक वो आवाज़ वापस आ जाये 
और यादो को ताज़ा कर जाये 
(C.J)

May 23, 2011

हारने के डर से जीना भूल गए हैं 
जवाब के डर से सवाल पूछना भूल गए हैं 
मंजिल तो तभी मिलेगी जब ,
बढ़ाएंगे उस ओर कदम पर,
गिरने  के डर से चलना भूल गए हैं

May 18, 2011

छोटी सी ख्वाहिश

जेब में कुछ सिक्के जो  होते ,
आसमान की सैर कर आते 


बदलो पर बैठकर जाते 
खुदा से कुछ बात कर आते 


नासमझ हैं पर फिर भी 
समझदारी की बात कर आते 


थोड़ी सी जिद करते
और जिद में
सबकी ख़ुशी मांग लाते 


छोटे छोटे हाथ हैं हमारे
पर बड़ी-बड़ी यादो को समेट लाते 


तुतलाती हुई जुबान से खुदा को 
डांट भी आते 


जब सब कहते हैं 
हम हैं तुम्हारे की स्वरुप 
फिर क्यों ठुकराते हैं 
डराते हैं ,मन पड़े तो मार भी देते हैं 
कुछ लोग हमें 


जब कहता खुदा हमसे के 
तुम हो मेरे ही बच्चे 
हम कहते के अपने 
बच्चो के खातिर कभी तो  धरती पर आ 


कभी कृष्ण बनकर 
कभी राम बनकर 
आये थे तुम धरती पर 
पर तुम्हे भी डराया था 
तुम हो भगवान इसीलिए 
तुमने सबको हराया था 


जब तुम्हे ही न समझ पाए वो पापी 
तो हम मासुमो को कैसे समझेंगे ....
(चिराग ) 

May 1, 2011

दुरिया

कुछ दूर तुम चलो 
कुछ दूर हम चले
जो चले एक दूजे की ओर
मिट जाएगी ये दुरिया

April 14, 2011

गुजारिश इतनी सी ....



ऐ चाँद आज धीरे चल,
चाँदनी के साथ तू भी मचल 

आज तू तारो को भी रोक ले ,
मदहोश हो जा तू भी मोहब्बत के नशे में 

ऐ चाँद आज अमावस तो नहीं हैं 
फिर भी तू कही छुप जा 
क्योंकि मेरा महबूब अपने होठो को ,
मेरे लबो से मिलाने से शरमा रहा हैं 

नजरो से नजरे चुरा रहा हैं 
आज मेरा प्यार मुझे बुला रहा हैं 

ऐ चाँद आज बिजलियो से कह दे  
के चमक जाये ,
ताकि मेरा महबूब मेरी बाहों से दूर न जाये 

ऐ चाँद आज कुछ ऐसा कर 
के ये रात खुशनसीब बन जाये 

आज ढलने ना दे रात को 
सूरज को भी उगने से रोक ले 

आज मेरी चाहत के खातिर 
बस इतना कर दे ...
(चिराग )

January 4, 2011

चाहत

बागो की कच्ची कलियों की महक 
तेरी चूडियो की खनक 
वो धुप में बारिश का आना 
वो चाँद का बदलो में छुप जाना 

पौ  फटते तेरी यादो में खो जाना 
सपनों में भी तेरा आना 
हर साँस में हैं तेरा नाम 
तुझे चाहना यही हैं मेरा काम 

चाहत को मेरी ना समझाना भूल 
तुझे पाना चाहता हूँ 
तेरा होना चाहता हूँ 
तुझमे ही आज खोना चाहता हूँ 

चाहू तो ज़िन्दगी तेरे नाम कर दूँ 
पर तू ही तो मेरी ज़िन्दगी हैं 
तुझे कैसे बतलाऊ 
दिखलाऊ कैसे मेरे दिल में बसा प्यार 

आईने में ना देख तस्वीर अपनी 
मेरे दिल में देख तकदीर अपनी 
तुझे पाना हैं मुझे 
बस यही शख्सियत हैं मेरी




                                                                 (चिराग )

September 26, 2010

मेरे आदरणीय गुरुजन

hello friends as i told u in the last post that i write poems in hindi
so iam posting here one of my poem that i wrote on Teacher's Day.


नयनो में ज्ञान की ज्योति हैं ,
घने जंगल में पगडण्डी हैं 
मेरे जीवन की सबसे बड़ी पूंजी 
और मेरे मस्तिष्क की कुंजी हैं 

हर मोड़ पर साथ दिया उन्होंने ,
जब-जब अंधियारे से डर कर पीछे हटा 
होंसलो की रोशनी दे कर 
आगे बढाया उन्होंने

 जब-जब सफलताओ को पाता हूँ 
हर जीत उनके नाम करता हूँ 
क्योंकि उन्होंने की तो सिखाया हैं 
हार से लड़ना  मुझे .

पंगु था एक कदम भी ना चल पाता
जो ना मिलता उनकी बैसाखी का सहारा
मझधार में ही डूब जाती मेरी नाव
जो ना मिलता उनके हाथो का किनारा 

नादानी भी करी कभी 
कभी करी बहुत बड़ी भूल 
पर उन्होंने हमेशा माफ़ करा
समझ अपने बगिया के फूल  

दी एक नयी पहचान उन्होंने 
मंजिलो को पाने का रास्ता भी दिखाया उन्होंने 
कभी डांटा भी , कभी मारा भी
पर फिर प्यार से पुचकारा भी उन्होंने 

इस शिक्षक दिवस पर करता हूँ 
करता हूँ प्रणाम सभी गुरुजनों को 
हमेशा बना रहे आशीर्वाद उनका 
ऐ खुदा ये दुआ तुझसे करता हूँ .


(ये कविता मैं अपने सभी गुरुजनों को समर्पित करता हूँ )

 (चिराग )




February 16, 2010

बदलता समय




पहले और अब के ज़माने मे ,
आ गया हैं अन्तर बहुत ,

पहले थे दिन बड़े ,
अब बड़ी होती हैं राते।

पहले मिलते थे तो कहते थे कैसे हैं आप ,
आजकल पूछते हैं कहाँ हो जनाब।

सुबह ६ बजे होती थी पहले सबसे राम राम ,
अब तो ६ बजे शुरू होता हैं आराम।

सच्चे मन से सुख दुःख में साथ देने वाले इंसान थे पहले ,
अब तो बन गए हैं सब proffesionalism के चेले ।

पहले नही थे जागरूक लोग इतने प्यारे ,
अब तो youngistan के जवान है कई सारे

पहले थी अन्धविश्वास की बीमारी ,
अब विशवास को मानती हैं जनता सारी ।

नही थी लड़कियों को इतनी आज़ादी पहले ,
अब तो लड़कियों ने सँभाल ली हैं देश को चलाने की जिम्मेदारी ।

पहले और अब में कई परिवर्तन आए हैं
कई अच्छे तो कई बुरे आए हैं ।

पहले के अनुभव और आज के जोश के साथ बढ़ना होगा हमें आगे ,
तभी हम बनेंगे इस दुनिया के सरताज प्यारे ।


(चिराग )

October 10, 2009

दोस्ती एक प्यारा रिश्ता .....


एक दिन मेरे खुदा ने मुझसे पूछा ,

क्या हैं ये दोस्ती ,
क्यो बनाता हैं तू दोस्त ,
ऐसा क्या हैं इस रिश्ते मैं ,
जो नही हैं लहू के रिश्ते में ।

मैंने खुदा से कहा ,
एक भरोसा हैं दोस्ती ,
एक विश्वास हैं दोस्ती ,
जो मुश्किलों में दे साथ ,
वो परछाई हैं दोस्ती ।

इन चीजों से क्या होता हैं ,
ये सब तो लहू के नातो में भी मिल सकता हैं ,
फ़िर क्यो करता हैं तू दोस्ती ,
क्यो करता हैं अपनो से ज्यादा विश्वास दोस्त पर ।



मेरे खुदा ,
आज भाई -भाई से लड़ रहा हैं ,
बेटा पिता को मार रहा हैं ,
लहू के रिश्तो में लहू हैं ,
इसीलिए हर कोई अपनो का लहू बहा रहा हैं ।

मेरी दोस्ती तो प्रेम का रिश्ता हैं ,
तभी उसमे प्रेम रस बहता हैं ।

दोस्ती की क्या मिसाल दूँ मैं ,
दो जिस्म एक जान हैं दोस्ती ,
आज के इस कलयुग में ,
तुम्हारे होने का अहसास हैं दोस्ती ।

सच कहा बन्दे तुने ,
दोस्ती की असली पहचान हैं तुझे
तू और तेरी दोस्ती सलामत रहे हमेशा ,
यही हैं मेरी दुआ हैं तुझे ।

July 27, 2009

Kuchh unkahee si...


...
Kya socha tha humne, aur ye kya hua
Unko to khabr hi nahi, koi deewana hua
Kya kaha humne, jo wo samjhe nahi
Kyon nazrein hai jhuki jhuki?

Deewano ki dar se
Hum to dur dur rehte the
Unke ghar se ho kar
Hum kabhi guzre hi nahi

Hum to taiyaar baythe the,
Aaj wo kehte hain, ke kaha kyon nahi
Wo to humare rah taqe baythe the
Puchhte hain unko lene gaye kyon nahi...

Hum to is chah me the ke
Bahon me le le unko,
Ek chhuwan ke liye wo taraste rahein,
Lekin kabhi kaha nahi...


Thanks for the time... People are missed when we are alone... (:

July 24, 2009

Aaj... A Sequel

Baandha tha jis bandhan mein tujhe
Aaj usey hai maine khola
Jin sapno mein dekha tha tujhe
Unse maine hai naata toda

Mann mera aaj udne ko hai
Har khushi mere kadam choomne ko hai
Kara tha tera intezaar
Socha tha tu aayega

Ab na rahi umeed tere aane ki
Kar le tu mujhpar aaj yakeen
Ab un raaho par na rakhungi kadam
Jo nishani hai hamare un lamho ki

Kar liya hai maine khud se yeh wada
Is nayi subah ke saath
Udne doongi apne is mann ko
Piroyega yeh fir aaj naye khwab

P.S.: I wrote this after Pratsie's post titled Aaj... :)


July 23, 2009

..just few thots..


logo ki bheed main,
kabhi-kabhi tum bhi mil jaate ho..
anjaano se anjaan bankar,
paas se guzar jaate ho..
Suraj ke dhalte hi,
andhere ki tanhai main chip jaate ho..
ghar ke ek kone main,
apne ehsaas ko bhitta dete ho..
subah hote hi andhere ke saath,
usse bhi le jaate ho..
main sochati hu,
mera saath dene aatey ho..
par kya maalum tha,
tum bhi ashiyaane ki talash main aatey ho..
apni tanhaai se bhaagte hue,
mere paas aa jaate ho..
aur bas do pal ki,
khushiyon ki umeed karte ho..
mere suney aagan main,
kuch nahi hai dene ko tume yeh jaante ho..
phir bhi meri bheegi palkon se har raat,
jaane kitne aansoo le jaatein ho..


ये क्या हो गया?

ये क्या हो गया?
कैसे कोई दिल में उतर आगया?
न हम तुम्हे जाने
न तुम्हे पहचाने
मगर फिरभी आगई हो तुम
मेंरे ख्वाबो के राहों में...

ये तुमने क्या किया?
कैसे मुझसे यूँ बातें करने लगी?
न हम तुम्हे जाने
न तुम्हे पहचाने
मगर गूंजे कानो में मेरे
हर वो बात जो तुमने कहा ...





Transliteration:

ye kya ho gaya?
kaise koi dil me utar aa gaya?
na hum tumhe jaane
na tumhe pehchane
magar phirbhi aagayi ho tum
mere khwabo ke raho me...

ye tumne kya kiya?
kaise mujhse yun baatein karne lagi?
na hum tumhe jaane
na tumhe pehchane
magar gunje kano me mere
har wo baat jo tune kaha...



July 4, 2009

माँ का लाल


माँ मुझे लाल टिका लगा दे ,
हाथो मैं बाँध दे लाल धागे ,
रणभूमि पर मैं जाऊंगा ,
छक्के दुश्मनों के मैं छुडाऊगा

देख उस वीर को रन में ,
थर-थर काँप रहे थे सारे ,
क्रोध से हो रही थी आँखे उसकी लाल ,
देख जिसे भाग गए कई कायर

बड़ी बहादुरी से लड़ा वो रण में ,
लाल कर दी धरती उसने ,
दुश्मनों के लहू से

रण जीत माँ का लाल जब घर आया ,
लाल फूलो का हार उसे पहनाया ,
सब थे खुश जीत पर उसकी ,
आँखों का तारा बन गया था वो सबकी ।




(now for the members who don't know hindi well)


maa mujhe laal tika laga de ,
haatho main bandh de laal dhage ,
ranbhumi par main jaunga ,
chhakke dushmano ke main chudaunga

dekh us veer ko ran mein ,
thar-thar kaanp rahe the saare ,
krodh se ho rahi thi aankhe usaki laal ,
dekh jise bhag gaye kai kayar

badi bahaduri se lada vo ran mein ,
laal kar di dharti usane ,
dushmano ke lahu se

ran jeet maa ka laal jab ghar aaya ,
laal fulo ka haar use pahnaya ,
sab the khush jeet par usaki ,
aankho ka taara ban gya tha vo sabki ।

July 2, 2009

लम्हे ......


लम्हे जो आते हैं याद ,
मुश्किलों मैं जो देते हैं साथ ,
जब चले जाते हैं ये लम्हे ,
करते हैं हम फरियाद

कई प्यारे साथी मिलते हैं इनमे ,
कई छोड़ जाते हैं साथ ,
कुछ प्यारी सी यादें जो होती हैं इनमे
होती हैं मिटटी की भीनी खुशबू सी ,
जो आती हैं पहली बारिश में याद

मौसम बदलते हैं ,बदलती हैं हवायें ,
कैसे रोके इन्हें जाते हुए ,
ये तो हैं दुनिया के नियम

धागों में पिरो कर इन लम्हों को,
माला बनाकर डाला हैं मैंने गले में ,
हमेशा साथ रहेंगे ये अब ,
बनकर सुनहरे सपने ।

(now for the members who don't know hindi well)



lamhe jo aate hain yaad ,
mushkilo main jo dete hain saath ,
jab chale jaate hain ye lamhe ,
karte hain hum fariyaad

kai pyare saathi milate hain iname ,
kai chod jate hain saath ,
kuch pyari si yaadein jo hoti hain iname
hoti hain mitti ki bheeni khushboo si ,
jo aati hain pahli baarish mein yaad

mausam badalate hain ,badalti hain hawaye ,
kaise roke inahe jaate huye ,
ye to hain dunia ke niyam

dhago mein piro kar in lamho ko,
maala banakar dala hain maine gale mein ,
hamesha saath rahenge ye ab ,
bankar sunahare sapne ।