April 24, 2009

एक अनकही दास्तान

बंद आंखों से देखा है मैंने एक सपना
की चाहूं जिसे उसे कह सकूं अपना
आँखें खुली तो हकीक़त सामने दिखी
किस्मत ने आंसुओं से थी ज़िन्दगी लिखी

अकेली आई थी, अकेली ही जा रही हूँ
क्या है मेरा अपना जो उसे दे जाऊं
अपनी मुस्कान कहीं पीछे छोड़ आई हूँ
शायद उनकी पलकों पर बसाकर चली आई हूँ

आंखों से गिरता मोती सवाल करता है
क्या वो भी तेरी आहट को तरसा करता है
क्या वो भी तन्हाई में कभी रोया करता है
या यह नादान दिल तेरा यूँही आहें भरा करता है

रात के अंधेरे में तन्हाई का एहसास हुआ
सरकती हवा से लगा जैसे उसी ने छुआ
तब भी दिल से निकली उनके लिए बस एक दुआ
की पूरा हो जाए उनका हर एक सपना
चाहे वो जिसे उसे कह सके अपना



PS: trying hindi after a long time....also at my blog http://thehope-life.blogspot.com/

7 comments:

  1. that's very good shweta
    i liked it very much
    kaif acche words use kare hai tumane speically this lines

    "
    आंखों से गिरता मोती सवाल करता है
    क्या वो भी तेरी आहट को तरसा करता है
    क्या वो भी तन्हाई में कभी रोया करता है
    या यह नादान दिल तेरा यूँही आहें भरा करता है"

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  2. Beautiful....Shweta dis one was so gud! excellent! luvd it! painful bt wonderful too! :)

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  3. @chirag

    i don't think i am that gud at hindi poetry but trying actually...so thanks for lliking it :P

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  4. @mav
    thankuuuuuuu so much...i am glad u guys liked it..

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Comments are sexy.