October 12, 2009

दिवाली

साल में आता है ऐसे दो दिन
बोलते है उसे खुशियों का त्यौहार 
जलते दीपक और ढ़ेर सारे पठाके 
मिठाई के साथ करते हम इंतज़ार  

पूजा करते है हम भगवान् के
इस दिन को पूरे भारत मनाते है
दुःख को भूलकर मनाये ख़ुशी को
शत्रुता को तोड़कर मनाये दोस्ती को
चलो हम इस दिवाली को दीपक जलाये
जो राह दिखाए एक बेहतर जीवन को



ps: apologies in advance for my very poor hindi :)

4 comments:

  1. heyy..nice try..gud to see some hindi frm u..:)

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  2. Beautiful and simple hindi poem dear....lived it..!!!

    Loune is already celebrating Diwali...i think i am lost somewhere..!!! will be here soon with my diwlai too..!!

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Comments are sexy.