एक दिन लालूजी बोले राबड़ी से,
चलो कर आये हम लन्दन की सैर ,
क्यों न बनाये कुछ दिन लन्दन में अपना बसेर.
(उस पर राबड़ी जी बोली के)
लन्दन-वंदन की सैर छोडिये,
पहले गठबंधन को जोड़िये,
आ रहे है चुनाव करीब अगर हार गए तो रहना पड़ेगा इसी बसेर।
(लालूजी बोलते है)
आप चिंता न करे चुनाव की ,
इस बार हम ही जीतेंगे गद्दी बिहार की।
इस बार कर ली हमने चुनाव की सारी तेयारी ,
और नीतिश से करली है हमने यारी.
(उस पर राबड़ी जी बोली के)
ऐसा क्या किया आपने जो नीतिश बन गए आपके यार,
दो दुश्मनों के बीच कैसे पनपा इतना प्यार.
(लालूजी बोलते है)
हमने नीतिश से कहा बस इतना,
के आधा राज तुम्हारा आधा अपना.
(उस पर राबडी जी बोली के)
लेकिन फिर कोन बनेगा मंत्री और,
कोन बनेगा संत्री.
(लालूजी बोलते है)
चिंता न करो देखि है हमने भी खूब दुनिया,
नीतिश बनेंगे मनमोहन और तुम सोनिया.
(उस पर राबडी जी बोली के)
हमें आप पर नाज़ है मेरे प्राणनाथ ,
आपने तो कर दिए हर मुश्किल रास्ते साफ़.
अब न है कोई बंधन न है किसी से बेर,
चलो बनाये कुछ दिन लन्दन में अपना बसेर.