October 15, 2009

सपना

बहुत अरसा बाद एक हिन्दी कविता लिखी है। उम्मीद है आप लोगों को पसंद आएगी ।


कतरा कतरा तिनका तिनका जोड़ के एक सपना सा बुना था
तेरी आंखों में कहीं उसको छुपाया था
सोचा था पलकें तुम मूंदे ही रहोगे
ख्वाबों को कभी बिखरने न दोगे
पर भूले थे हम कि रात तो बीत जाती है
और पलकें भी खुल ही जाती हैं
पर ख्वाबों की रातें अभी और भी हैं
और न सही तो
हकीकत को ही हम
ख्वाबों सा बना लेंगे ।

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