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February 19, 2009

ये है अपनी दुनिया


कई रंगों से सज़ा है ये दरबार ,
हर रंग का अपना है अंदाज़ मेरे यार

सब भरते है रंग अपनी कला से यहाँ ,
खुबसूरत लगता है विभिन् रंगों से सज़ा ये जहाँ

सब मिलकर करते है यहाँ बात ,
पुरी कोशिश है सबकी के ये lounge बने blogs का सरताज

कई धुरंधर योद्धा है यहाँ ,
सबकी अपनी कला है यहाँ

stepman जैसा बहादुर है यहाँ
तो arjun जैसा व्यंगकार भी है यहाँ

काजल से सुनने को मिलती है प्यारी कविताये यहाँ
तो pretty सुनती जीवन के हसीन पल यहाँ

Tan की बात भी है निराली
aarti भी लिखती है कहानी सायानी

राघव जैसा फ़िल्म समीक्षक है यहाँ
तो भार्गव जेसा फ़िल्म का ज्ञानी भी हैं यहाँ

हर कोई है यहाँ लाजवाब,
मुश्किल में देते है एक दसूरे का साथ


लिखेतु ,asabh,संदीप का करता हूँ मैं शुक्रिया अदा
के उन्होंने मुझे इस प्यारी सी दुनिया का सदस्य बनने का मौका दिया ।


friends this poem i wrote for all the members of the Lounge
i write some of the members name in this poem
now iam not able to cover all the members name so if someone got hurt from this
sorry for that person.